मस्ती
Posted by उदयराज बाळ on April 3, 2006
मैं गाने वाला पंछी
नित नये गीत मैं गाऊँ
कोई सुने या ना सुने
मैं अपना जी बहलाऊँ ||
मैं रमता झुमता जोगी
मै अपनी धुनी रमाऊँ
कोई आये या ना आये
मैं चलता चला जाऊँ ||
मैं उडता फिरता बादल
बुंदे अपनी बरसाऊँ
कोई भीगे या ना भीगे
धरती की प्यास बुझाऊँ ||